Tuesday, May 26, 2009

DEKH KABEERA (COLUMN)

देख कबीरा ...........

जिंदगी में अनेकानेक हादसे ऐसे हो जाते हैं जो ताउम्र नही भूलते. हादसे जो दिल को छू जाते हैं, बाँटने में मज़ा आता है। बरसों जनसत्ता में यह कॉलम लिखता रहा. अब जब ब्लॉग शुरू किया तो सोचा हो जाए एक बार फ़िर से। इस कॉलम के चलते पहले भी बहुत दुलराया था दोस्तों ने. अब इतने सालों बाद दोस्तों की गिनती में इजाफा तो हुआ ही है, तो दुलार में कमी कैसे आएगी?

खुशी
अमरीकी हास्य अभिनेता जिमी दयूरांत एक बार एड स्लीवन नाम के पत्रकार के साथ न्यूयार्क खाड़ी में स्टेटन टापू पर एक अस्पताल में गया, जहाँ उसने दूसरे विश्व युद्ध के जख्मी फौजियों के मनोरंजन के लिए एक प्रोग्राम पेश करना था। उसी दिन उसने न्यूयार्क शहर में रेडियो पर भी प्रोग्राम पेश करने थे। योजना यह थी की फौजियों के प्रोग्राम के बाद वे निश्चित समय पर पानी वाले जहाज पर सवार होकर न्यूयार्क पहुँच जायेंगे।

फौजियों को उसका प्रोग्राम बहुत पसंद आया। उनको इतना खुश देख कर
दयूरांत ने प्रोग्राम पूरा हो जाने के बाद एक और आइटम पेश की। फौजी और भी ज्यादा खुश हुए। यह देख कर दयूरांत एक और आइटम पेश करने की तैयारी करने लगा तो स्लीवान ने कहा 'पागल हो गए हो? पहले ही देर हो चुकी है। अगर जहाज निकल गया तो समय पर शहर नहीं पहुँच पाएंगे।'
'जरा पर्दे से झांक कर दर्शकों की पहली कतार की ओर तो देख।' दयूरांत ने उसकी बात को नज़रंदाज़ करते हुए कहा।
सलीवान ने देखा तो पहली कतार में उसे दो फौजी बैठे हुए नज़र आए, जिनकी एक एक बांह कटी हुयी थी और वो दोनों मिलकर एक दूजे के एक एक हाथ से तालियाँ बजा रहे थे।

2 comments:

shama said...

Saw "cinecraft" in one of your blog lists!

Thanks for the comment on my blog," fiber art"!

Aapka link waheen se liyaa..ajeeb ittefaaq hai..mai kahanee kaar bhee hun, aur film making kaa course bhee kiya hai..!
Apnee hee ek kahanee parse ek short film bhi shoot kee.."Ek khoya hua din"..( Ye katha mere"kahanee" blogpe maujood hai).
"Line of continuity" ke hisaabse film behtareen banee lekin, nayika ke diction se mai khush nahee hun..

Waise mere sare blogs ke links, har blog pe hain..
"Aatank waad" ko leke maine kaafee likha aur, ek abhyaspoorn, lekin poorn taya interview based documentary banana chah rahee hun..abse meree zindagee maine apne deshke naam likh dee hai..

htpp://lalitlekh.blogspot.com

is blog pe, "gazab qanoon"ke tehet,Indian Evidence Act, dafa,25/27 ka maine vishleshan kiya hai.."kahanee" blogpe isee qanoon ko maddenazar rakhte hue, "kab hoga ant" ye katha bhee likhi hai.Gar aap is qanoon ko padhenge, to dang reh jayenge...!
Aapki pratikriya kaa intezaar rahega..!

http://shama-kahanee.blogspot.com

Shama said...

Maine "In the shadow of terror" kaa jo frame work banaya hai,use forward kar doongee..!
Tippanee ke liye tahe dilse dhanywad!
Aapne kaunsee kahanee pooree padhee, kya ye bata sakte hain?

Mujhe khud ko, us film," Ek khoya hua din"se samaadhan nahee hai...isliye use jabtak apnee tasallee ke mutabiq nahee banatee, upload karna nahee chahungi!